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Featured Poem

Showcasing the unique collection of Hind and English poems.

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लगता है मैं अब बूढ़ा होने लगा हूँ

​​नीम का पेड़ आजकल धुंधला सा दिखने लगा है लगता है की मेरे चश्मे का नंबर बदल गया है सिर के बाल भी सफेदी की चादर ओढ़ने लगे हैं घुटनो में भी आजकल कुछ दर्द पनपने लगा है कल डॉक्टर भी कह रहा था बी पी की दवाई शुरू कर दो समझ में नहीं आ…

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कही ये तुम्हारी आहात तो नही

उस रात हवाएं भी रुक रुक के चल रही थी और चाँद भी लूका छुपी का खेल खेल रहा था। राहों में अज़ीब सा सन्नाटा सा पसरा हुआ था ऐसा लगता था की मौसम भी सहमा हुआ था। तारे तो पहले ही आखो से ओझल हो चुके थे बादलों ने उन्हें अपने पहलु में छुपा…

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हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ

हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ, हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ ये मुझे तब एहसास होता है जब हवाएँ मुझे झकझोर कर जगाती हैं जब अख़बार वाले की आवाज़ बालकनी तकआती है| ऐसा लगता है ज़िंदगी जैसे ठहर सी गयी है अनकहे सवालो मे उलझ सी गयी है. कमरों मे लगे जाले वक़्त गुजरने…

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वो औरत है साहब…..

वो औरत है साहब उसे मत सताओ, बड़े ही दर्द मे वो जीवन बिताती है | वो घर बनाती है और घर सजाती है, जीना दुस्वार है फिर भी जिए जाती है| तपती धूप मे या घनी बरसात मे, आप के साथ कदम से कदम मिलाती है | कभी फ़ुर्सत निकाल के उसके दिल से…

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