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Monthly Archives: July 2017

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कही ये तुम्हारी आहात तो नही

उस रात हवाएं भी रुक रुक के चल रही थी और चाँद भी लूका छुपी का खेल खेल रहा था। राहों में अज़ीब सा सन्नाटा सा पसरा हुआ था ऐसा लगता था की मौसम भी सहमा हुआ था। तारे तो पहले ही आखो से ओझल हो चुके थे बादलों ने उन्हें अपने पहलु में छुपा…

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