हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ

हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ, हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ
ये मुझे तब एहसास होता है
जब हवाएँ मुझे झकझोर कर जगाती हैं
जब अख़बार वाले की आवाज़ बालकनी तकआती है|
ऐसा लगता है ज़िंदगी जैसे ठहर सी गयी है
अनकहे सवालो मे उलझ सी गयी है.
कमरों मे लगे जाले वक़्त गुजरने का एहसास दिलाते हैं
मेज पर रखी किताबों पर भी मोटी धूल जम गयी है
सिगरेट के धुओं के छल्ले बनते हैं, टूट जाते हैं.
ऐस ट्रे का डब्बा भी अब भर चुका है
केबल का कनेक्सन भी महीनो पहले कॅट चुका है
बहुत दिनो से कोई मेहमान भी नही आया है
कल एक दोस्त का फ़ोन आया था,
पूछा की क्या तू अभी भी जिंदा है?
मैने भी हंस कर कहा, यार साँस लेना भी कैसी आदत है
उसी आदत का शिकार हूँ, हाँ मैं अब भी ज़िंदा हूँ
या फिर शायद किसी का इंतजार है मुझे, पर पता नही किसका.
वक़्त की आदत भी बिल्कुल आदमी सी हो गयी है,
जब देखो तब मुह चिढ़ाता रहता है, मुझे याद दिलाता रहता है
की हाँ मै ज़िंदा हू, हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ

…. विनय प्रकाश मणि



Actually, Vinay is a writer by chance and writing is one of his passion. He love to pen down his thoughts in the form of blogs/articles & forums. He is a poet too :) Despite having a tough life, he is also passionate about the social relationship and he loves to interact with the new crowd across the globe.


'हां मैं अब भी ज़िंदा हूँ' has 1 comment

  1. June 28, 2017 @ 11:29 am Prashant

    “Ha mai ab bhi jinda hu…”
    Bahut Sundar!
    The lines are so magical that , it makes me feel , yes I am really alive!!!.

    Reply


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